Thursday, 17 June 2021

रिश्ते...

#रिश्ते# हर माता- पिता ये चाहते है कि उनके बच्चे उनका सम्मान करें,उन्हें हमेसा यूं ही प्यार करे...पर एक बहुत गौर करने वाली है,कि वही माता-पिता उन्ही बच्चो के सामने अपने माता-पिता की बुराई करते है...उन्हें समनं नही देते है...जब हम एकल परिवार में रहने लगे,तब  से ना तो हम अपने माता-पिता को याद करते है..ना ही बच्चो को ही पता है कि उनके दादा-दादी या नाना-नानी ने उनके माता-पिता को कैसे संघर्षों के साथ पालन-पोषण किया है...और तब जब बच्चे बहुत ज्यादा वक्त अपने दादा-दादी के साथ वक़्त नही बिता पाते है,तब तो उनके माता-पिता की और भी जिम्मेदारी हो जाती है..कि वो अपने बच्चो को अपने माता-पिता के बारे में बताए...आज कल हम ऐसे बहुत सारे घर देखे है जहाँ जो बच्चे आज पैरंट्स बन गए है,उन्होंने अपने घरों उनकी तस्वीर तक नही लगाई,और उनके बच्चो ने अपने पैरंट्स को लेकर इमोशनल होते देखा है...जो पैरेंट्स अपनी माँ के जाने के एक दिन बाद ही घर और कपड़ो का बंटवारा करने लगते है...और कहते है कि वो बहुत  व्यावहारिक सोच रखते है...तो क्या लगता है बहुत समय नही लगता है,उनके खुद के बच्चो का व्यावहारिक होने में....ऐसे पेरेंट्स आज उम्मीद लगाते है कि उनके बच्चे यूं ही हमेसा उन्हें चाहंगे... क्या ऐसा होता है...हम जो देते है हमे वो ही वापस मिलता है....सोचिएगा जरूर...#आहुति#

Thursday, 27 May 2021

#दोस्त#...

इक दोस्त ऐसा भी होना चाहिए..जो डाक पेटी की तरह हो,जिसमे अपने मन की सारी बाते चिट्ठियों में लिख कर,बिना पते की...उसमे छोड़ आये...बस खुद ही पढ़ ले वो,ना किसी को वो सुनाए..ना कहीं वो पहुचाये....जब कभी किसी के साथ मुझे देखे..अनजान बन खड़ा मुस्कराए...दोस्त भी ऐसा हो.. जो मेरा सब कुछ खुद में समेट कर मुझसे ही अजनबी हो जाए...#आहुति#

Saturday, 22 May 2021

#रिश्ते#

....उन स्त्रियों से ज्यादा गुनाहगार वो पुरुष होते है..जो एक स्त्री के कहने से अपने माता-पिता अपने परिवार को छोड़ देते है...और समाज कहता है अपनी पत्नी के कहने पर किया उसने. हमे एक बात आज तक समझ मे नही आई,कि क्या वो पति इतना मजबूर होता है कि अपनी पत्नी के कहने पर अपने परिवार की छोड़ दे..ऐसा नही है.. पति मजबूर नही होता..वो बेटा कमजोर होता है,कायर होता है...जो अपने परिवार के लिए कुछ करना नही चाहता.. और अपनी कमजोरियो को अपनी पत्नी की मर्जी के पीछे छिपा कर खुद को बचा लेता है...पत्नी तो जिम्मेदारियां तब समझेगी जब पति भी उन्हें निभाना चाहता हो हर हालात में..एक बार पत्नी को वो ये एहसास तो कराए की कितना जरूरी है..उसके लिए ये परिवार-माता-पिता-भाई-बहन.....सभी और वो अपनी पत्नी से कहे कि मैं सभी जिम्मेदारी पूरी कर लूंगा अगर वो उसका साथ दे तो....और ये भी अगर साथ नही भी देगी..तो भी मैं जिम्मेदारियां पूरी करूंगा....फिर देखिए क्या इतना मुश्किल है...#आहुति#

Sunday, 4 April 2021

परिवार अलग हो गए....!!!

परिवार एक था...
बच्चो के लिए  माता-पिता का प्यार एक था....
घर एक था...
घर का द्वार एक था.....
ना जाने कैसे सबकी चौखटे अलग हो गई....
देहरी अलग हो गयी....
रिश्तों में खटास आ गयी,
एक ही माता-पिता के बच्चो के परिवार अलग हो गए...कुछ वक़्त तो त्योहार एक हुआ करते है.. 
समय भी बदल गया अब तो त्योहार अलग हो गए...परिवार अलग ही गए.....
ना जाने किस सुख के पीछे हम,अकेले ही भागे जा रहे है...कुछ देर ठहर कर सोच तो लो...
सुकून तो सिर्फ परिवार के साथ मिल जाएगा... 
एक पल ऐसा भी आएगा,
हमारे पास धन-दौलत तो बहुत होगी,
बस खर्च करने वाले रिश्ते छूट जायँगे..
नाम-शोहरत तो होगी,
पर हमारे साथ जश्न मनाने वाले पीछे छूट जायँगे.. परिवार अलग ही गए....

Wednesday, 3 March 2021

अहम.....!!!

अहम.....जब रिश्तों में आता है,तो सब बिखर जाता है...हम किसी और देश की नही,हम अपने भारत की बात करते है....यहां रिश्तों को पूजा जाता है...उन्ही रिश्तों में पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही खूबसूरत,बहुत नाजुक,और बहुत ही गहरा होता है....एक ऐसा रिश्ता जिसमे कोई स्वार्थ नही होता...इस रिश्ते में प्यार,सम्मान,समझदारी सब अपने आप ही आ जाता है..जहां कोई मेरा तुम्हारा नही,हमारा हो जाता है.....हमने महसूस किया है कि ना जाने ये रिश्ता कब इतना गहरा और जरूरी हो जाता है,कि जहां हम बिना कुछ कहे सब समझने लगते है...इतना जरूरी की अपनी सांसे भी अब हमारी नही होती,सब इस रिश्ते का हो जाता है...सब इस रिश्ते के लिए हो जाता है..........मैं भी पढ़ी-लिखी selfdepned लड़की हूँ, पर मुझे कभी ये नही लगा कि मैं ही इस रिश्ते के लिए क्यों करूँ, क्यों मैं जिम्मेदारियां लूं...क्यों मैं ही खाना बनाऊं,क्यों मैं ही घर और बाहर सभी काम करूँ... पता नही...कभी मेरे मन क्यों नही आया....शायद ये रिश्ता मेरे लिए बहुत जरूरी है,या इस रिश्ते की सच्चाई,या हमारा साथ और प्यार....कई बार हमने खुद से पूछा क्यों रिश्ते में अहम या  मैं आ जाता है...क्यों कई बार करवाचौथ का व्रत महिला सशक्तिकरण बन जाता है...क्यों खाना बनाना-खिलाना- ध्यान रखना अहम को ठेस पहुँचा जाता है....हमने बहुत सारे रिश्ते देखे है,जहां प्यार मिल रहा है,सम्मान मिल रहा है..वहाँ सिर्फ अपने अहम के चलते रिश्तों दरकिनार करके खुद को बेवजह तर्क देकर justifiy करके बच कर निकल रहे है...ना जाने किस आज़ादी के पीछे भाग रहे है....पर एक सच जो दिखता नही है..पर कड़वा सच है कि ये आज़ादी आखिर में सिर्फ तन्हाई और अकेलापन ही लाती है.....जरा सोच कर देखिएगा ....क्यों कि हम भारत मे रहते है...#आहुति#

Saturday, 20 February 2021

#बस यूं बातों-बातों में#



कल हमें मेरी एक बहुत पुरानी एक सहेली मिली,बहुत दिनों बाद मिले थे,तो बाते भी बहुत थी...तो बातों-बातों में हमने पूछ ही लिया और ससुराल कैसा है?
 पतिदेव कैसे है? तो अब वो जो शुरू हुई तो हम उसे सुनकर दंग रह गए..बोली ससुराल तो ठीक है...
मेरी सास भी अच्छी है..पर हमने अपने पति से कह दिया है कि मैं तो अलग अपनी गृहस्थी बनाऊंगी,
सभी लोग अच्छे है..पर मेरे भी तो कुछ अरमान है,
जो मुझे पूरे करने है...मैं तो अपने पति से कह देती हूं,
जो मुझे चाहिए तो चाहिए.. मुझे नही पता कैसे करोगे,पर हमें चाहिए...मैं उसकी बातें सुनकर हँसने लगी,मैं कहा तुम वही लड़की हो,जो अपने परिवार के पहले सोचती थी,अपनी जरूरते खुद ट्यूशन पढ़ा कर पूरी करती थी....तो वो मेरी बात काटते हुए बोली...ये सब महान कर सबके लिए करते रहना,जिम्मेदारियां निभाना...सबको खुश रखना,..सब बकवास है...अपने लिए खुद हमे सोचना पड़ता है...कोई और नही सोचता...हम नही चाहते कि जिम्मेदारियां निभाते-निभाते हमारी अपनी जिंदगी भी निपट जाएगी...जो मैं होने नही दूंगी....मैं एक दम चुप हो गयी...वो अपनी ही सारी बाते करती रही,और चली गयी....मैं सोचती रही कि, कितनी आसानी से लोग खुद को अपनी हर गलती पर सही साबित कर लेते है...और खुश भी रहते है...और एक हम है अगर कोई रिश्ता भी हमसे छूट जाए,कोई जिम्मेदारी अगर हम ना निभा पाए..तो खुद को माफ नही कर पाते है......#आहुति#

Sunday, 31 January 2021

यादों वाली फरवरी ...☺☺☺☺☺☺


गुलाबी से एहसास लाता है ये महीना....बहुत कुछ दिया है इस फरवरी ने....तुम्हारा साथ,प्यार एहसास सब कुछ....इस महीना का हर पल हर दिन गवाह है....हमारे होने साथ.... पिछले साल इस दिन से आज से हर दिन गईं रही थी,क्यों कि इस महीने बंधे थे,हम एक-दूजे के संग....बहुत जिम्मेदारियों के चलते में महसूस ही नही कर पायी, वो शादी से पहले वाली दिनों में दिलो का धड़कना....मैं अपनी ही शादी जिम्मेदारी इतनी व्यस्त थी,मुझे सोचने का वक़्त ही नही मिला, मुझे कैसा दिखना है,मैं क्या पहनूँगी...किस तरह सजना है....सब कुछ मन का ही हो रहा था,फिर कुछ मन का कुछ कर ही नही पायी....सब इतनी जल्दी-जल्दी हो रहा था कि मुझे वक़्त ही नही मिला,खुद से ये पूछने का की मैं कैसे महसूस कर रही हूं......ऐसी ही यादों से भरी पड़ी है...ये फरवरी☺☺#आहुति#